मंगलवार, 11 मई 2010

६ मई २०१०

साधु ! साधु !! साधुवाद लेने के पात्र हैं विशेष न्यायालय के माननीय न्यायाधीश श्री ऍम ऍम तहलियानी और भारत सरकार के अधिवक्ता श्री उज्ज्वल निकम जी।

दिनांक ६ मई २०१० के दिन पाकिस्तानी आतंकी अजमल कसाब को विशेष न्यायालय द्वारा मृत्युदंड की सजा सुनाई गयी। बहुत कड़ी मेहनत की श्री उज्ज्वल निकम जी ने। उन्होंने अपनी प्रतिभा का पूरा उपयोग करते हुए अपने देश के लिये अपनी जान जोखिम में डालकर न्यायालय के सामने उचित साक्ष्य प्रस्तुत करके माननीय न्यायाधीश महोदय द्वारा एक ऐतिहासिक फैसला कराया।

माननीय न्यायाधीश श्री एम एम तहिलयानी और माननीय अधिवक्ता महोदय श्री उज्ज्वल निकम को नमन और साधुवाद।

परन्तु अब यह प्रश्न उठता है कि क्या इस फैसले से आतंकवादियों का पनाहगार और आतंकवादी प्रशिक्षण का केंद्र देश पाकिस्तान कुछ सबक लेगा ? क्या आतंकवादी देश पाकिस्तान अपनी धूल-धूसरित साख को विश्व-पटल पर फिर से सवारने की कोशिश करेगा ?

एक हिन्दुस्तानी होने के नाते ऐसे प्रश्नों के उत्तर अब हमें सोचने ही होंगे, इन पर गहनता से विचार करना होगा।

मेरे अपने विचार से पाकिस्तान का जन्म ही आतंक के द्वारा हुआ है। तो क्या वो अपनी जन्म-जात आदत को बदल सकेगा ? हाँ बदलना अब हम हिन्दुस्तानियों को होगा। अब हम सभी हिन्दुस्तानियों को मिल कर बुलंद आवाज़ में अपने देश की सरकार से मांग करनी होगी कि अब समय है पाकिस्तान जैसे आतंकी अड्डों वाले देश को मुहतोड़ जवाब देने का। आतंकवाद के प्रशिक्षक देश पाकिस्तान को नेस्तनाबूद करने का। पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब देते हुए सबक सिखाने का। जिससे फिर कभी पाकिस्तान जैसे कायर देश अपनी कायरता का प्रदर्शन हिन्दुस्तान में करने से बाज आये।

हम हिन्दुस्तानियों को मिलकर भारत सरकार के सामने यह आवाज उठानी होगी कि कसाब और अफजल गुरु जैसे लोगों को सरकारी अतिथि ना बनाकर जल्द से जल्द फांसी के फंदे पर लटकाएं, जिससे इन दरिंदों को दी गयी सजा पूरी हो और इनके जैसे अन्य सिरफिरे आतंकियों और उनके आकाओं को सबक मिले।

अजमल कसाब को फांसी के फंदे पर झुलाने से ही पाकिस्तान को करारा जवाब मिलेगा और साथ ही हम विशेष न्यायालय के माननीय न्यायाधीश और माननीय अधिवक्ता महोदय को सही रूप से धन्यवाद कर सकेंगे।

वन्दे मातरम्------------

भारत माता कि जय-----------

2 टिप्‍पणियां:

  1. पूर्णतः सहमत. देश के ऐसे दुश्मनों को केवल फांसी की सजा सुनना ही पर्याप्त नहीं है वरन देखना ये है की हमारे इस कछुआ चाल से चलने वाले न्याय तंत्र और भ्रष्ट संसद की बदोलत वास्तविकता में कब फांसी मिल पाती है.. फिलहाल ३ महीने तो केवल कसाब की सजा के कागज़ तैयार होने में लगेंगे..

    पर वास्तव में समय आ गया है जब सभी देश वासियों को देश हित में आगे आकर ऐसे आतंकवादियों की सजा मुकम्मल करने की मांग इस मरी सरकार से करना चाहिए जिसने पिछले ८ साल से अफजल जैसे लोगों को मेहमान बना के रखा हुआ है...

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  2. Hon'ble Justice with the help of public prosecutor bravely came out with the considered view in form of judgement before us. Now the actions of G.O.I. & Govt. machineries comes into play. Most unfortunately I recount the issue of Afzal Guru which is hanging in limbo for so long . Although I do not know the reasons to it whether deliberately or otherwise but it is most unfortunate part ! Let me remind readers the IRAQ issue and see how fast the USA was in preperations & actions regarding Saddam Hussain and his aids. We all r looking forward to the final fate of this KASAB case ! Political divide should not deter the National issues. I am of this view. Gopal Shukla is quick to lime lite this issue on his blog. Congratulations for his thoughtful write ups and for his DESH BHAKTI. astrofun2u@gmail.com

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