शनिवार, 5 नवंबर 2022

महाराजा जामनगर दिग्विजय सिंह और पोलैंड का सम्बन्ध





            आपने पोलैंड का नाम सुना होगा। कुछ लोगों ने पोलैंड की यात्रा भी की होगी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पोलैंड की राजधानी वारसो में जामनगर के महाराजा दिग्विजय सिंह के नाम पर एक चौक क्यों समर्पित किया गया? 

            ये कहानी भारत के वसुधैव कुटुंबकम की धारणा से जुड़ी है। बात दूसरे विश्व युद्ध की है। जब 1939 में जर्मनी और रूस की सेना ने पोलैंड पर कब्जा कर लिया। इस युद्ध में अपने देश को बचाने के लिए पोलैंड के हजारों सैनिक मारे गये और उनके बच्चे अनाथ हो गये। 

            1941 तक ये बच्चे पोलैंड के शिविरों में रहते रहे, लेकिन इसके बाद रूस ने बच्चों को वहाँ से भगाना शुरू कर दिया। तब 600 से ज्यादा बच्चे अकेले या अपनी माँ के साथ एक नाव पर सवार होकर जान बचाने के लिये निकले थे। अनेक देशों से इन लोगों ने शरण माँगी पर सभी देशों ने शरण देने से इनकार कर दिया। तब भारत अंग्रेजों का गुलाम था और अंग्रेजों ने भी बच्चों को आश्रय देने से मना कर दिया। 

            दूसरे विश्वयुद्ध के समय पोलैंड पूरी तरह तबाह हो गया था। सिर्फ महिलाएं और बच्चे बचे थे बाकी वहाँ के सब पुरुष युद्ध में मारे गये थे। पोलैंड की स्त्रियों ने अपने बच्चों के साथ और कुछ बचे लोगों को साथ लेकर पोलैंड छोड़ दिया। काफी देशों में भटकने के बाद उनका जहाज भारत के गुजरात में स्थित जामनगर के तट पर रुका, तब वहाँ के राजा जाम दिग्विजय सिंह जडेजा ने उनकी दीन-हीन हालत देख कर उन्हे अपने राज्य में आश्रय दिया। केवल आश्रय ही नहीं दिया बल्कि उनके बच्चों को आर्मी की ट्रेनिग दी, उनको पढ़ाया-लिखाया। बाद में उन्हे हथियार देकर पोलैंड भेजा। जहाँ उन्होंने जामनगर में मिली आर्मी की ट्रेनिग से देश को पुनः आजाद कराया। 

            पोलैंड के निवासी महाराजा साहब जामनगर को अन्नदाता मानते है। पोलैंड के संविधान के अनुसार जाम दिग्विजय सिंह उनके लिए ईश्वर के समान है। इसीलिए उनको साक्षी मानकर आज भी वहाँ के नेता संसद में शपथ लेते हैं। पोलैंड मे यदि किसी भी नागरिक ने जाम दिग्विजय सिंह जी का अपमान किया तो सजा के तौर पर उसे तोप के मुँह पर बांध कर उड़ा दिया जाता है। आज भी पोलैंड जाम साहब के उस सुकर्म को नहीं भूला। 

            दुर्भाग्य से भारत देश मे ऐसे इतिहास को नहीं पढ़ाया गया। महाराजा जामनगर दिग्विजय सिह जी को अधिकांश भारतीय जानते ही नहीं होंगे। इन वामियों और कांगीयों ने ऐसे सारे इतिहास को छुपा दिया। परंतु अब समय आ गया है कि जब हम अपने इतिहास को सभी भारतीयों तक पहुंचाएं। 

वन्दे मातरम 

भारत माता की जय 


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